Mirambika Crisis: peaceful sit in protest pictures – this morning, DOE inspection

The protest continues through the monsoon rains. Sandeep Behera has begun his fast this morning.

Despite the DDA’s clear legal opinion in favor of Mirambika  and SAES having received a show cause notice against the proposed engg college, Mangu eagerly awaits the July 17th court hearing before making any move. Why? He is supremely confident that the court will condone SAES illegalities of 14/4 & 1/7 and force the petitioner parents to accept the incomplete, unsafe, not meant for free progress integral education Matri Store building aka Vatika Barracks. Mother’s blessing for the crook’s designs? Mangu’s chamchas (Changus) are confident that the court will not hear the parent petitioners, not apply the law strictly and thus make them accept an un-appealable order based on  some compromise. Such mind readers! Meanwhile, as in the past, he is confident of controlling the output of the DOE inspection because kids of senior DOE officials and other IAS etc babus study at the Mother’s International School.  Apparently, the DOE inspection was carried out with temporary arrangements being shown as final. For example, an otherwise always closes door was opened from Matri Store building aka Vatika Barracks to show a fire safety exit, gaps etc were covered with sheets, all construction work and activities in the kitchen underneath were paused to reduce the deafening noise, Mirambika & MIS children were told to study quietly to improve the pathetic acoustics, etc. DOE officials were seen helping the SAES as if they were paid servants on SAES payroll. In all, the DOE inspection report is a foregone conclusion. It’ll favor SAES at least till the kids of senior DOE officials and other IAS etc babus study at the Mother’s International School. The need of the hour is for an independent inspection of the Matri Store building aka Vatika Barracks to see its compliance with basic building laws leave aside is obvious to the fair lack of fitness for Mirambika. This should be done for all other SAES & Ashram controlled buildings. MCD sources say that even the Ashram building is significantly non- compliant.

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3 thoughts on “Mirambika Crisis: peaceful sit in protest pictures – this morning, DOE inspection

  1. 007 July 11, 2015 / 12:00 pm

    Who owns the ashram land, how much is it? Is the ashram land the real ashram land or is some dda land mixed with it without demarcation…

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  2. Amit July 11, 2015 / 2:46 pm

    बारिश का मजा खुले आसमान के नीचे। बगल में गाड़ी और गरम गरम खाना। यही तो है ज़िन्दगी !
    यह धरना मई के महीने मैं क्यों नहीं किया ?
    वैसे इस धरने के बारे मैं आपकी क्या राय है ?
    http://goo.gl/EV3iCj
    _______________

    प्रिये याचिकाकर्ताओं,

    अगर आप कानून के विपरीत जायेंगे तो मिराम्बिका में ताला लगवाएंगे।

    आप दिल्ली विकास प्राधिकरण से दिल्ली उच्च न्यालय में शपथ पत्र मांग ले की कॉलेज की ज़मीन पे विद्यालय चलाने में उनको कोई एतराज नहीं, और वह पट्टा विलेख का उल्लंघन नहीं।

    कानूनी राय अगर कारण बताओ नोटिस के विपरीत है तो जाहिर है की खारिज कर दी गयी है। कानूनी राय मात्र एक विभागीय आंतरिक चर्चा का दस्तावेज है। अगर कानूनी राय सही है तो दिल्ली विकास प्राधिकरण को शपथ पत्र देने में कोई एतराज नहीं होना चाहिए।

    बच्चों के लिए सही व्यवस्था माँग सकते हो, हर्जाना मांग सकते हो, कथित तौर पर भ्रष्ट अधिकारी और स्कूल प्रबंधन को हटवा सकते हो, पर कॉलेज की ज़मीन पर नहीं चल सकता विद्यालय, यही कानून है। यह बात समझ गए तो होगी जीत।

    या फिर कानून बदलवा लो और चला लो विद्यालय।

    शुक्र मनाओ की जज साहेब ने ये नहीं पुछा की क्या आपका दिमाग घास चरने गया है जो की करीब दस एकर कॉलेज की सर्व-श्रेष्ठ ज़मीन पर चलाना चाहते हो मात्र १४९, वह भी ज्यादातर संभ्रांत व्यक्ति का विद्यालय ?

    माना की हुई है तुम्हारे बच्चोें के साथ बेईमानी। मिलनी चाहिए कुछ मूर्खो को सजा। लेकिन, गैरकानूनी तरीके से थो विद्यालय नहीं चलाया जा सकता ! मामला सिर्फ इतना हे की बच्चोें को मिलनी चहीहे पड़ने की सही व्यवस्था। मेरे हिसाब से वह जगह है मदर हेल्थ सेंटर के ३ खंड।

    शिक्षा डायरेक्टर के बच्चे पढ़ते हैं मदर इंटरनेशनल स्कूल में। दाखिला हुआ प्रबंधन कोटे से। सोचते हो की शिक्षा विभाग सही निरक्षण करेगा ?
    अभी भी वक्त हे। न्यालय से बोलो, नहीं भरोसा शिक्षा विभाग पर !
    विद्यालय हो मदर हेल्थ सेंटर में। मदर हेल्थ सेंटर हो जहाँ विद्यालय हे अब।
    एक जमाने में मदर हेल्थ सेंटर यहीं था।

    और मैनेजमेंट दे पूरा ब्यौरा की खाली की गयी ज़मीन का क्या करेगी?
    लिखित में दे की नहीं होगा इंजीनियरिंग कॉलेज में मैनेजमेंट कोटा।
    नहीं होगा नोटों के बल पर दाखिला।

    एक और तरीका है।
    भूमि पट्टा बदला जा सकता है अगर स्कूल प्रबंधन याचिका लगाये।

    तब सवाल होगा की क्या करीब १० वर्गगज़ की ज़मीन पर चलेगा मात्र १४९ बच्चो का विद्यालय और उसको चलाने के लिए पैसा कहाँ से आएगा ?
    कोई योजना है ?

    ये मसला लड़ाई झगड़े से सुलझने वाला नहीं।
    इसको मिराम्बिका के सभी पक्ष खुद सुलझाये तोह बेहतर है।

    बहकावे में मत आओ और वर्थ बातो में समय ना गवाओ।
    इस शनिवार सुबह १० बजे सभी पक्षों की सभा बुलाओ।
    खुले दिमाग से आओ और समस्या का समाधान निकालो।
    नहीं तो सब एक दूसरे से लड़ते रहो।

    मंगा से निबटने के लिए तो जिंदगी पड़ी है !

    धन्यवाद !
    __________________________

    यह मुकाबला है बड़ा दिलचस्प !
    शैतान बनाम शैतान ?
    कौन किससे बड़ा ?
    लगे रहो, या दिमाग की बत्ती जलाओ !
    लेकिन क्या बहिसों के आगे बीन बजाने का कोई फायदा है ?

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    • Anupama chib July 13, 2015 / 9:14 am

      Amit, agar hamara school narmada ke paas hota ya shadipur ya kisi aur jagah par open drain ke paas hota toh hum vahaan par dharna karte. Par hamara school idhar hae toh ham idhar hee baitthenge. Agar tent hae toh tent lagaa liyaa hae. Please don’t unnecessarily focus on all these points.
      School mein abhi jitne bache haen zaroori nahi hae ki hamesha usne hee honge. Agar management engineering college ki jagah, mirambika ko 12 tak barhaane mein focus kare aur integral education teacher training ke liye B ed college par focus kare toh hamesha bache itne kam nahi rahenge. Ye sab tab ho saktaa hae agar intention sahi ho toh. Unhone har baat ko jalebi ki Taraah ghumaya hae. Parents hamesha school ke saathh rahe haen. Pranjal babu ne sahi intention ke saathh, sab logon ko saathh mein le kar agar planning ki hote toh aaj ye sab nahi ho rahaa hota. Spasht aur Sachi baat ki jagah unhone Anek jhhootth bole haen.

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